Monday, September 7, 2026

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आईटीआई परीक्षा की बेहतर तैयारी

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Synchronous Motor: Working Principle, Non-Self Starting, Excitation, V-Curves aur Applications

ITI Electrician Synchronous Motor Master Notes in Hindi | Working Principle, Non-Self Starting, Excitation, V-Curves & Applications

ITI Electrician Synchronous Motor Master Notes in Hindi: Working Principle, Non-Self Starting, Excitation, V-Curves & Applications
(सिंक्रोनस मोटर: कार्य सिद्धांत, स्वतः स्टार्ट न होना, एक्साइटेशन, V-कर्वेस और अनुप्रयोग)

विद्युत शक्ति प्रणालियों में नियत गति (Constant Speed) पर चलने वाली और पावर फैक्टर को नियंत्रित करने में सक्षम Synchronous Motor (सिंक्रोनस मोटर / तुल्यकालिक मोटर) का ITI Electrician Trade Theory और इलेक्ट्रिकल मशीनों के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

यह एक ऐसी डबल एक्साइटेड मशीन है जिसका स्टेटर एसी सप्लाई से और रोटर डीसी सप्लाई से जुड़ा होता है। इस विस्तृत मास्टर चैप्टर में हम इसके कार्य सिद्धांत, स्वतः स्टार्ट न होने के कारण, डीसी एक्साइटेशन, V-कर्वेस और व्यापक अनुप्रयोगों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

1. What is a Synchronous Motor? (सिंक्रोनस मोटर क्या है?)

Synchronous Motor एक ऐसी एसी मोटर है जो हमेशा सिंक्रोनस गति (Synchronous Speed) पर ही चलती है, चाहे उस पर लोड शून्य हो या उसकी पूर्ण निर्धारित क्षमता (Full Load) हो। इसकी गति केवल आपूर्ति आवृत्ति (Frequency) और पोलों की संख्या पर निर्भर करती है। इसे स्टेटर पर 3-फेज एसी सप्लाई और रोटर पर डीसी एक्साइटेशन दोनों की आवश्यकता होती है।

Synchronous Speed Formula (तुल्यकालिक गति सूत्र)

Ns = (120 x f) / P
(जहाँ f = आपूर्ति आवृत्ति और P = पोलों की संख्या है)

2. Working Principle (कार्य करने का सिद्धांत)

सिंक्रोनस मोटर का मूल कार्य सिद्धांत Magnetic Locking (चुंबकीय लॉकिंग) पर आधारित है। जब स्टेटर को 3-फेज एसी सप्लाई दी जाती है, तो स्टेटर में एक घूर्णीय चुंबकीय क्षेत्र (Rotating Magnetic Field – RMF) उत्पन्न होता है जो सिंक्रोनस गति से घूमने लगता है। जब रोटर को डीसी सप्लाई देकर चुम्बਕित किया जाता है, तो रोटर के ध्रुव (Poles) स्टेटर के घूमते हुए चुंबकीय क्षेत्र के साथ चुंबकीय रूप से बंध (Lock) जाते हैं। इसके बाद रोटर भी उसी गति से घूमने लगता है जिस गति से RMF घूम रहा होता है।

3. Why Synchronous Motor is Non-Self Starting? (यह स्वतः स्टार्ट क्यों नहीं होती?)

सिंक्रोनस मोटर स्वाभाविक रूप से सेल्फ-स्टार्ट (Self-Starting) नहीं होती है क्योंकि:

  • स्टेटर का चुंबकीय क्षेत्र (RMF) अत्यधिक उच्च गति से सिंक्रोनस स्पीड पर घूमता है।
  • रोटर भारी होने के कारण अपनी जड़ता (Inertia) के कारण तुरंत उस उच्च गति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता।
  • एसी की आवृत्ति बहुत तेज होने के कारण रोटर के ध्रुव एक पल आगे और एक पल पीछे आकर्षित होते हैं, जिससे रोटर अपनी जगह पर केवल कंपन (Oscillation) करता है और कोई औसत प्रारंभिक टॉर्क (Average Starting Torque) उत्पन्न नहीं होता।
  • इसे स्टार्ट करने के लिए या तो डैम्पर वाइंडिंग (Damper Winding) या पोनी मोटर (Auxiliary Motor) का उपयोग करना पड़ता है।

4. Role of DC Excitation (डीसी एक्साइटेशन की भूमिका)

रोटर पोलों को चुम्बकीय ऊर्जा प्रदान करने के लिए दी जाने वाली डीसी सप्लाई को Excitation (एक्साइटेशन) कहा जाता है। एक्साइटेशन के स्तर के आधार पर मोटर तीन अलग-अलग स्थितियों में कार्य कर सकती है:

1. Under-Excited Motor (अंडर-एक्साइटेड)

जब डीसी एक्साइटेशन सामान्य से कम होता है, तो मोटर लैगिंग पावर फैक्टर (Lagging PF) पर कार्य करती है और इंडक्टिव लोड की तरह व्यवहार करती है।

2. Normal-Excited Motor (सामान्य-एक्साइटेड)

जब एक्साइटेशन बिल्कुल सही स्तर पर होता है, तो मोटर यूनिटी पावर फैक्टर (Unity PF – 1.0) पर कार्य करती है। आर्मचर करंट न्यूनतम होता है।

3. Over-Excited Motor (ओवर-एक्साइटेड)

जब डीसी एक्साइटेशन सामान्य से अधिक होता है, तो मोटर लीडिंग पावर फैक्टर (Leading PF) पर कार्य करती है और कैपेसिटर की तरह रिएक्टिव पावर देती है।

Power Factor Control

इसी गुण के कारण ओवर-एक्साइटेड सिंक्रोनस मोटर को ‘सिंक्रोनस कंडेनसर’ के रूप में पावर फैक्टर सुधारने के लिए उपयोग किया जाता है।

5. V-Curves and Inverted V-Curves (V-कर्वेस और इनवर्टेड V-कर्वेस)

सिंक्रोनस मोटर के प्रदर्शन को समझने के लिए V-Curves अत्यंत महत्वपूर्ण ग्राफ होते हैं:

  • V-Curves Definition: आर्मचर करंट (Armature Current – Ia) और डीसी फील्ड करंट (Field Current – If) के बीच विभिन्न लोड स्तरों पर खींचे गए वक्र (Curves) अंग्रेजी के अक्षर ‘V’ के आकार के दिखाई देते हैं, इसलिए इन्हें V-Curves कहा जाता है। इसमें न्यूनतम आर्मचर करंट यूनिटी पावर फैक्टर की स्थिति को दर्शाता है।
  • Inverted V-Curves Definition: पावर फैक्टर (Power Factor) और फील्ड करंट (Field Current) के बीच खींचे गए वक्र उल्टे ‘V’ (Inverted V) के आकार के होते हैं, जहाँ सबसे उच्चतम बिंदु पर पावर फैक्टर इकाई (Unity) होता है।
Excitation State (एक्साइटेशन स्थिति) Power Factor (पावर फैक्टर) Armature Current (आर्मचर करंट) Behavior & Application (व्यवहार)
Under-Excited लैगिंग (Lagging PF) अधिक (High) इंडक्टिव लोड की तरह कार्य करती है।
Normal-Excited इकाई (Unity PF – 1.0) न्यूनतम (Minimum) मानक सिंक्रोनस संचालन।
Over-Excited लीडिंग (Leading PF) अधिक (High) सिंक्रोनस कंडेनसर के रूप में पावर फैक्टर सुधारना।
ITI CBT Exam Important Question (महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न):

ओवर-एक्साइटेड सिंक्रोनस मोटर (Over-excited Synchronous Motor) विद्युत परिपथ में किस रूप में कार्य करती है और इसका पावर फैक्टर क्या होता है?

Answer: सिंक्रोनस कंडेनसर (Synchronous Condenser) के रूप में, और इसका पावर फैक्टर लीडिंग (Leading PF) होता है।

6. Common Faults and Troubleshooting (सामान्य दोष और निवारण)

Fault / Problem (दोष) Possible Causes (संभावित कारण) Troubleshooting Steps (निवारण के चरण)
Motor Fails to Synchronize (Pull-in Fail) डीसी एक्साइटेशन का समय पर ऑन न होना या लोड का बहुत अधिक होना लोड कम करें, डीसी एक्साइट वोल्टेज और फील्ड स्विच की जाँच करें।
Loss of Synchronism (Out of Step) अचानक भारी ओवरलोड आना या वोल्टेज में भारी गिरावट (Voltage dip) प्रोटेक्टिव रिले द्वारा मोटर ट्रिप कराएं, लोड फ्लक्चुएशन नियंत्रित करें।
Excessive Hunting / Oscillation लोड में अचानक उतार-चढ़ाव या डैम्पर वाइंडिंग का क्षतिग्रस्त होना डैम्पर बार्स की कंटिन्यूटी जाँचें और फ्लाईव्हील या गवर्नर सुधारें।

7. Applications (व्यापक अनुप्रयोग)

  • Power Factor Correction: उद्योगों और सब-स्टेशनों में लो पावर फैक्टर को सुधारने के लिए सिंक्रोनस कंडेनसर के रूप में।
  • Constant Speed Drives: कपड़ा मिलों, पेपर मिलों और रोलिंग मिलों में जहाँ अत्यंत सटीक और नियत गति की आवश्यकता होती है।
  • Heavy Industrial Drives: बड़े कंप्रेसर, पंप, ब्लोअर और माइनिंग मोटर ड्राइव्स में।
  • Voltage Regulation: लंबी ट्रांसमिशन लाइनों के अंत में वोल्टेज नियमन और ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए।

8. ITI Electrician Exam ke liye Important Points (परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु)

  • Constant Speed: Operates at a strictly constant synchronous speed regardless of load variations.
  • Non-Self Starting: Requires auxiliary starting methods like damper winding or pony motor.
  • Double Excited: Stator is connected to AC supply, and rotor is excited by a DC source.
  • V-Curves: Plot of armature current versus field current showing minimum armature current at unity power factor.
  • Synchronous Condenser: An over-excited synchronous motor running on no-load to supply leading reactive power.

9. Conclusion (निष्कर्ष)

Synchronous Motor विद्युत मशीनों की दुनिया में अपनी नियत गति और पावर फैक्टर सुधारने की क्षमता के कारण विशिष्ट स्थान रखती है। ITI Electrician के छात्रों को इसके कार्य सिद्धांत, स्वतः स्टार्ट न होने के कारण, डीसी एक्साइटेशन, V-कर्वेस तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों की पूरी तकनीकी जानकारी होनी चाहिए।

यह टॉपिक CBT Exam, ट्रेड थ्योरी परीक्षाओं और एसी मशीनरी प्रैक्टिकल के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।