Monday, September 7, 2026

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आईटीआई परीक्षा की बेहतर तैयारी

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Amplifier: Working Principle, Classification (Class A, B, C, AB), Transistor Amplification aur Applications

ITI Electrician Amplifier Master Notes in Hindi | Working Principle, Classification (Class A, B, C, AB), Transistor Amplification & Applications

ITI Electrician Amplifier Master Notes in Hindi: Working Principle, Classification (Class A, B, C, AB), Transistor Amplification & Applications
(एम्प्लीफायर: कार्य सिद्धांत, वर्गीकरण – क्लास A, B, C, AB, ट्रांजिस्टर प्रवर्धन और अनुप्रयोग)

इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों (जैसे कमजोर ऑडियो या रेडियो सिग्नलों) की शक्ति, वोल्टेज या करेंट के आयाम (Amplitude) को विकृत किए बिना बढ़ाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को Amplifier (प्रवर्धक) कहा जाता है। ITI Electrician Trade Theory और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणालियों के अंतर्गत यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण टॉपिक है।

एम्प्लीफायर मुख्य रूप से ट्रांजिस्टर (BJT या FET) की स्विचिंग और प्रवर्धक क्षमताओं पर आधारित होते हैं। इस विस्तृत मास्टर चैप्टर में हम इसके कार्य सिद्धांत, ट्रांजिस्टर एम्प्लीफिकेशन, क्लासिफिकेशन (Class A, B, C, AB) और अनुप्रयोगों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

1. Amplifier क्या है? (What is an Amplifier?)

Amplifier एक ऐसा सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक सर्किट (Active Electronic Circuit) है जो डीसी पावर सप्लाई की ऊर्जा का उपयोग करके इनपुट पर दिए गए कमजोर सिग्नल के आयाम को कई गुना बढ़ा देता है और आउटपुट पर एक शक्तिशाली सिग्नल प्रदान करता है। सिग्नल के आकार में होने वाली इस वृद्धि को प्रवर्धन (Amplification) कहा जाता है।

Amplification Basic Flow (संकेत प्रवर्धन प्रवाह)

Weak Input Signal (Low Amplitude) → Transistor Biased in Active Region → DC Power Utilization → Large Amplified Output Signal

2. Working Principle (कार्य करने का सिद्धांत)

एम्प्लीफायर का मूल कार्य सिद्धांत ट्रांजिस्टर के बायसिंग (Biasing) पर आधारित होता है। ट्रांजिस्टर को हमेशा Active Region (सक्रिय क्षेत्र) में बायस किया जाता है। जब बेस (Base) या गेट पर कोई सूक्ष्म एसी सिग्नल दिया जाता है, तो कलेक्टर करन्ट (Collector Current) में भारी परिवर्तन होता है। कलेक्टर सर्किट में लगे लोड रेसिस्टर के सिरों पर मिलने वाला यह बदला हुआ वोल्टेज इनपुट सिग्नल की तुलना में बहुत बड़ा होता है, जिससे प्रवर्धन प्राप्त होता है।

3. Transistor Amplification Modes (कॉमन एमीटर एम्प्लीफायर)

ट्रांजिस्टर को एम्प्लीफायर के रूप में जोड़ने की तीन मुख्य कॉन्फ़िगरेशन होती हैं:

1. Common Emitter (CE)

यह सबसे अधिक उपयोग होने वाला कॉन्फ़िगरेशन है क्योंकि इसमें वोल्टेज गेन और करेंट गेन दोनों बहुत अच्छे (High gain) मिलते हैं।

2. Common Base (CB)

इसमें वोल्टेज गेन मिलता है लेकिन करेंट गेन एक से कम होता है। इसका उपयोग उच्च आवृत्ति (High frequency) मिलान के लिए होता है।

3. Common Collector (CC)

इसे वोल्टेज फॉलोअर या एमीटर फॉलोअर भी कहते हैं। इसका वोल्टेज गेन लगभग 1 होता है लेकिन करेंट गेन बहुत उच्च होता है (Impedance matching).

Active Biasing

एम्प्लीफायर को बिना डिस्टॉर्शन के सिग्नल बढ़ाने के लिए सटीक डीसी ऑपरेटिंग पॉइंट (Q-point) की आवश्यकता होती है।

4. Classification of Amplifiers (एम्प्लीफायर का वर्गीकरण – Class A, B, AB, C)

आउटपुट सिग्नल कितने समय (Conduction Angle) तक सक्रिय रहता है, इसके आधार पर एम्प्लीफायर को मुख्य रूप से चार वर्गों में बांटा गया है:

Amplifier Class (वर्ग) Conduction Angle (चालन कोण) Efficiency (दक्षता) Main Advantage & Application (मुख्य लाभ और उपयोग)
Class A 360° (पूरा चक्र) कम (25% से 30%) कोई डिस्टॉर्शन नहीं (Zero crossover distortion); ऑडियो प्री-एम्प्लीफायर में प्रयुक्त।
Class B 180° (आधा चक्र) मध्यम (लगभग 78.5%) पुश-पुल कॉन्फ़िगरेशन में उपयोग; क्रॉसबार्क डिस्टॉर्शन संभव।
Class AB 180° से 360° के बीच 50% से 60% क्लास A और B का सबसे बेहतरीन संयोजन; ऑडियो पावर एम्प्लीफायर में सर्वाधिक प्रयुक्त।
Class C 180° से कम (< 180°) अत्यधिक उच्च (> 90%) रेडियो फ्रिक्वेंसी (RF) ट्यून किए गए सर्किट और ऑसिलेटर्स में प्रयुक्त।
ITI CBT Exam Important Question (महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न):

किस क्लास के एम्प्लीफायर की कार्यकुशलता (Efficiency) सबसे अधिक होती है और इसका चालन कोण 180 डिग्री से कम होता है?

Answer: Class C Amplifier (क्लास सी एम्प्लीफायर)

5. Gain and Frequency Response (गेन और आवृत्ति प्रतिक्रिया)

  • Voltage Gain (Av): आउटपुट वोल्टेज और इनपुट वोल्टेज का अनुपात।
  • Power Gain: आउटपुट पावर और इनपुट पावर का अनुपात।
  • Frequency Response: एम्प्लीफायर की वह विशेषता जो यह दिखाती है कि वह विभिन्न आवृत्तियों पर कितना समान लाभ (Gain) देता है।

6. Common Faults and Troubleshooting (सामान्य दोष और निवारण)

Fault / Problem (दोष) Possible Causes (संभावित कारण) Troubleshooting Steps (निवारण के चरण)
No Output Signal (Dead) डीसी पावर सप्लाई फेल होना, ट्रांजिस्टर का शॉर्ट या ओपन होना, कपलिंग कैपेसिटर खराब होना पावर सप्लाई वोल्टेज मापें, ट्रांजिस्टर और कैपेसिटर की कंटिन्यूटी जाँचें।
Distorted Output (विकृति) गलत बायसिंग (Q-point shift), इनपुट सिग्नल ओवरड्राइव होना बायसिंग रेसिस्टर्स की वैल्यू चेक करें और इनपुट सिग्नल कम करें।
Humming / Noise फिल्टर कैपेसिटर खराब होना या अर्थिंग (Grounding) में कमी पॉवर सप्लाई फिल्टर कैपेसिटर बदलें और ग्राउंडिंग दुरुस्त करें।

7. Applications (अनुप्रयोग / उपयोग)

  • Audio Systems: म्यूजिक सिस्टम, पब्लिक एड्रेस (PA) सिस्टम और स्पीकरों में आवाज को तेज करने के लिए।
  • Radio Receivers: रेडियो तरंगों को पकड़ने और उन्हें प्रवर्धित करने के लिए RF एम्प्लीफायर।
  • Instrumentation & Sensors: बहुत कमजोर सेंसर सिग्नलों (जैसे तापमान या दबाव) को मापने योग्य बनाने के लिए।
  • Television & Communication: वीडियो सिग्नलों और ट्रांसमिशन लाइनों में सिग्नल स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए।

8. ITI Electrician Exam ke liye Important Points (परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु)

  • Primary Function: Increases the amplitude of weak electrical signals without changing their frequency or shape.
  • Operating Region: Transistor in an amplifier is always operated in the Active Region.
  • Class A Efficiency: Lowest efficiency (25-30%) but best signal fidelity (no distortion).
  • Class C Efficiency: Highest efficiency (>90%) used in tuned RF circuits.
  • Most Popular Config: Common Emitter (CE) configuration is widely used due to high voltage and current gain.

9. Conclusion (निष्कर्ष)

Amplifier इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणालियों का एक अनिवार्य और बुनियादी घटक है। ITI Electrician के छात्रों को एम्प्लीफायर के कार्य सिद्धांत, ट्रांजिस्टर बायसिंग, विभिन्न वर्गों (Class A, B, C, AB) की दक्षता और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों की पूरी तकनीकी जानकारी होनी चाहिए।

यह टॉपिक CBT Exam, ट्रेड थ्योरी परीक्षाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रैक्टिकल के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।