Marking and Layout Tools Master Notes: Scriber, Punches, Surface Gauge
ITI Fitter Marking and Layout Tools Master Notes in Hindi:
Scriber, Punches, Surface Gauge & Dividers Guide
(मार्किंग और लेआउट टूल्स: स्क्राइबर, पंच, सरफेस गेज और डिवाइडर – संपूर्ण मार्गदर्शिका)
फिटर कार्यशाला (Fitter Workshop) में किसी भी मेटल जॉब पर कटिंग, फाइलिंग या मशीनिंग करने से पहले उसकी सतह पर ड्राइंग या रेखाएँ खींचने के लिए जिन उपकरणों का उपयोग किया जाता है, उन्हें Marking and Layout Tools (मार्किंग और लेआउट टूल्स) कहा जाता है। ITI Fitter 1st Year Trade Theory के अंतर्गत यह एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और आधारभूत टॉपिक है।
इस विस्तृत मास्टर चैप्टर में हम मार्किंग मीडिया, स्क्राइबर, सरफेस गेज (Surface Gauge), विभिन्न प्रकार के पंच (Centre Punch, Prick Punch) तथा उनके उचित उपयोग का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. Introduction to Marking and Layout (मार्किंग और लेआउट का परिचय)
Marking वह प्रक्रिया है जिसमें किसी ड्राइंग या ब्लूप्रिंट के अनुसार जॉब की सतह पर रेखाएँ (Lines), वृत्त (Circles) और केंद्र बिंदु (Center points) अंकित किए जाते हैं। सही लेआउट और मार्किंग के बिना कोई भी जॉब सटीक आयामों में तैयार नहीं किया जा सकता। मार्किंग करने से पहले धातु की सतह पर चौक पाउडर या कॉपर सल्फेट (Copper Sulphate) का लेप लगाया जाता है जिसे Marking Media कहते हैं।
Core Punch Angle Specifications
Centre Punch Point Angle = 90° (Drilling witness marks)
Prick / Dot Punch Point Angle = 60° (Dotted line spacing)
2. Major Marking and Layout Tools (प्रमुख मार्किंग और लेआउट औजार)
कार्यशाला में लेआउट तैयार करने के लिए निम्नलिखित मुख्य उपकरणों का उपयोग किया जाता है:
- Scriber (स्क्राइबर): यह हाई कार्बन स्टील (High Carbon Steel) से बना एक नुकीला औजार होता है जिसका उपयोग धातु की सतह पर बारीक रेखाएँ खींचने के लिए किया जाता है।
- Surface Gauge (सरफेस गेज / स्क्राइबिंग ब्लॉक): यह एक बेस, स्पिंडल और स्क्राइबिंग टूल से मिलकर बनता है। इसका उपयोग समानांतर रेखाएँ खींचने और जॉब की ट्रुथनेस (Trueness) चेक करने के लिए किया जाता है।
- Divider (डिफ़ाइडर): वृत्ताकार चाप (Arcs) बनाने, दूरियों को स्थानांतरित करने और रेखाओं को विभाजित करने के लिए दो नुकीली टांगों वाला उपकरण।
- Try Square (ट्राय स्क्वायर): 90 डिग्री के कोण की जाँच करने और सीधी समकोण रेखाएँ खींचने के लिए।
3. Detailed Classification of Punches (पंच के प्रकार और उनके कोण)
मार्किंग लाइनों को स्थाई (Permanent) बनाने और ड्रिल बिट्स को सही स्थान पर बैठाने के लिए पंच का उपयोग किया जाता है:
1. Centre Punch (सेंटर पंच)
इसका पॉइंट एंगल 90 डिग्री होता है। इसका मुख्य उपयोग ड्रिलिंग से पहले गाइड होल या गड्ढा बनाने के लिए होता है।
2. Prick Punch (प्रिक पंच)
इसका पॉइंट एंगल 30 डिग्री या 60 डिग्री होता है। यह हल्की मार्किंग और डिवीज़न लाइनों को पक्का करने के लिए प्रयुक्त होता है।
3. Dot Punch (डॉट पंच)
इसका पॉइंट एंगल 60 डिग्री होता है। इसका उपयोग पंचिंग लाइन पर डॉट-डॉट (Witness marks) दूर-दूर अंकित करने के लिए होता है।
4. Automatic Punch
,इसमें स्प्रिंग मेकैनिज्म होता है जिसे बिना हथौड़े (Hammer) के केवल हाथ से दबाकर पंचिंग की जाती है।
| Punch Type (पंच का प्रकार) | Point Angle (पॉइंट कोण) | Primary Application (मुख्य उपयोग) |
|---|---|---|
| Prick Punch | 30° or 60° | हल्की मार्किंग और डिवीज़न पॉइंट लगाना। |
| Dot Punch | 60° | कटिंग लाइन को पक्का करने के लिए डॉट निशान। |
| Centre Punch | 90° | ड्रिल होल करने से पहले गहरा सेंटर गड्ढा बनाना। |
| Scriber | 12° to 15° (Tip) | धातु की सतह पर स्पष्ट लाइनें खींचना। |
ड्रिलिंग (Drilling) करने से पहले ड्रिल बिट को सही स्थान पर बैठाने के लिए किस पंच का और कितने कोण वाले पॉइंट का उपयोग किया जाता है?
Answer: सेंटर पंच (Centre Punch), जिसका पॉइंट एंगल 90 डिग्री (90°) होता है।
4. Common Faults and Maintenance / Troubleshooting (दोष और रखरखाव)
| Fault / Problem (दोष) | Possible Causes (संभावित कारण) | Maintenance Steps (रखरखाव के चरण) |
|---|---|---|
| Blunting of Scriber Point | स्क्राइबर को फर्श पर गिराना या कठोर धातु पर गलत उपयोग करना | ऑयल स्टोन (Oil stone) पर घिसकर स्क्राइबर के पॉइंट को दोबारा नुकीला करें। |
| Mushroom Head on Punches | लंबे समय तक हथौड़े की चोट से पंच के ऊपरी हिस्से का फैल जाना | ग्राइंडर पर मशरूम हेड को घिसकर chamfer करें ताकि चोट लगते समय छर्रे न उड़ें। |
| Inaccurate Layout Lines | स्क्राइबर की नोक का मुड़ा होना या सरफेस गेज का बेस ढीला होना | औजारों की नियमित जाँच करें, उन्हें कैलिब्रेट करें और साफ सुथरा रखें। |
5. Applications in Fitter Workshop (कार्यशाला में अनुप्रयोग)
- Job Layout Preparation: नए मेटल जॉब पर कटिंग और फाइलिंग की सीमा रेखाएँ खींचने में।
- Transferring Measurements: सरफेस प्लेट पर रखकर ऊंचाई और समानांतर दूरियों को जॉब तक पहुँचाने में।
- Machining Guidance: ड्रिलिंग, मिलिंग और शेपर ऑपरेशन से पहले सटीक केंद्र बिंदु और गाइड मार्क्स स्थापित करने में।
6. ITI Exam ke liye Important Points (परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु)
- Scriber Material: Manufactured from high-carbon steel with hardened and ground sharp points (12° to 15°).
- Centre Punch Angle: Exactly 90 degrees, designed specifically to provide a conical seat for drill bit points.
- Prick Punch Angle: 30° or 60°, used for light layout work and dividing line intersections.
- Marking Media Purpose: Applied to metal surfaces to provide a clear, high-contrast background for scriber lines.
- Maintenance Rule: Never use a blunt or mushroom-headed punch, as it can slip or cause injury during hammering.
7. Conclusion (निष्कर्ष)
Marking and Layout Tools फिटर ट्रेड का सबसे पहला और महत्वपूर्ण व्यावहारिक चरण हैं। ITI Fitter के छात्रों को स्क्राइबर, सरफेस गेज, विभिन्न पंचों के कोण (30°, 60°, 90°) तथा उनके सही रख-रखाव की पूरी तकनीकी जानकारी होनी चाहिए।
यह टॉपिक CBT Exam, ट्रेड थ्योरी परीक्षाओं और कार्यशाला प्रैक्टिकल के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।