Grinding Wheel Master Notes: Abrasive, Bond, Grade, Structure
ITI Fitter Grinding Wheel Master Notes in Hindi:
Abrasive, Bond, Grade, Structure & Marking Guide
(ग्राइंडिंग व्हील: अपघर्षक, बॉन्ड, ग्रेड, संरचना और अंकन प्रणाली – संपूर्ण मार्गदर्शिका)
फिटर कार्यशाला (Fitter Workshop) में धातुओं को काटने, फिनिशिंग देने, शार्पनिंग करने और अतिरिक्त धातु को खुरचकर हटाने के लिए प्रयुक्त होने वाले घूमने वाले कर्तन औजार (Rotating cutting tool) को Grinding Wheel (ग्राइंडिंग व्हील) कहा जाता है। यह अनगिनत छोटे अपघर्षक कणों (Abrasive grains) से मिलकर बना एक बहु-कर्तन धार वाला टूल है। ITI Fitter 1st Year Trade Theory के अंतर्गत यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक है।
इस विस्तृत मास्टर चैप्टर में हम ग्राइंडिंग व्हील के प्रमुख घटकों (Abrasive, Bond, Grade, Structure), मानक अंकन प्रणाली (Standard Marking System), व्हील के दोष (Glazing & Loading) तथा ट्रूइंग-ड्रेसिंग ऑपरेशंस का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. Introduction and Core Components (परिचय और मुख्य घटक)
एक ग्राइंडिंग व्हील मुख्य रूप से दो प्रमुख चीजों से बनता है: Abrasives (अपघर्षक कण) जो धातु को काटते हैं, और Bond (बंधक एजेंट) जो इन कणों को आपस में बांधकर रखता है। इसके अलावा कणों के बीच खाली स्थान को Structure कहते हैं।
Core Elements of Grinding Wheel
Standard Marking Sequence: Abrasive Type -> Grain Size -> Grade -> Structure -> Bond Type
2. Major Types of Abrasives (अपघर्षक के प्रमुख प्रकार)
1. Aluminium Oxide (A)
भूरे या सफेद रंग का अपघर्षक जिसका उपयोग उच्च तन्यता वाली धातुओं (High tensile strength metals) जैसे माइल्ड स्टील, अलॉय स्टील और टूल स्टील के लिए किया जाता है।
2. Silicon Carbide (C)
काले या हरे रंग का अत्यधिक कठोर और भंगुर अपघर्षक। इसका उपयोग कम तन्यता वाली धातुओं (Low tensile strength) जैसे कास्ट आयरन, पीतल, तांबा और टंगस्टन कार्बाइड के लिए होता है।
3. Grinding Wheel Specification Elements (व्हील विनिर्देश के घटक)
| Specification Parameter (मापदंड) | Symbols / Range (प्रतीक / रेंज) | Description & Function (विवरण और कार्य) |
|---|---|---|
| 1. Abrasive Type | A (Aluminium Oxide) / C (Silicon Carbide) | जॉब की धातु के अनुसार उपयुक्त अपघर्षक का चयन। |
| 2. Grain Size (ग्रैन साइज) | Coarse (10-24), Medium (30-60), Fine (80-180), Very Fine (220-600) | कणों का आकार। खुरदरी कटिंग या महीन फिनिशिंग तय करना। |
| 3. Grade (व्हील ग्रेड) | Soft (A-H), Medium (J-P), Hard (Q-Z) | बॉन्ड की मजबूती जो कणों को पकड़े रखती है। नरम धातु के लिए कठोर व्हील और कठोर धातु के लिए नरम व्हील। |
| 4. Structure (संरचना) | Dense (0-7) / Open (8-14) | कणों के बीच की दूरी (Spacing). ओपन स्ट्रक्चर चिप्स हटाने में मदद करता है। |
| 5. Bond Type (बॉन्ड प्रकार) | V (Vitrified), S (Silicate), B (Resinoid), R (Rubber), E (Shellac) | कणों को जोड़ने वाला एडहेसिव। सबसे अधिक उपयोग होने वाला बॉन्ड विट्रिफाइड (V) है। |
सामान्य कार्यशालाओं में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला और सबसे मजबूत ग्राइंडिंग व्हील बॉन्ड कौन सा है?
Answer: विट्रिफाइड बॉन्ड (Vitrified Bond – प्रतीक ‘V’)
4. Common Wheel Faults: Glazing and Loading (व्हील के प्रमुख दोष)
- Glazing (ग्लेज़िंग): जब ग्राइंडिंग व्हील के कटिंग एज घिसकर चिकने (Dull) हो जाते हैं, तो व्हील काम करना बंद कर देता है और चमकने लगता है। इसका कारण गलत ग्रेड या अत्यधिक स्पीड है।
- Loading (लोडिंग): जब नरम धातुओं के कण ग्राइंडिंग करते समय व्हील के छिद्रों (Pores) के बीच भर जाते हैं (Clogged), तो इसे लोडिंग कहते हैं।
5. Truing, Dressing and Balancing (ट्रूइंग, ड्रेसिंग और बैलेंसिंग)
| Operation (ऑपरेशन) | Purpose (उद्देश्य) |
|---|---|
| Truing (ट्रूइंग) | व्हील की घिसी हुई सतह को पुनः गोल (Concentric) और सही आकार में लाना। |
| Dressing (ड्रेसिंग) | ग्लेज्ड या लोडेड व्हील की सतह से बंद कणों और कचरे को हटाकर नए तेज कटिंग एजेज बाहर निकालना। |
| Balancing (बैलेंसिंग) | व्हील के असंतुलन को दूर करना ताकि मशीन पर कंपन (Vibration) न हो। |
6. Safety Precautions in Grinding (ग्राइंडिंग सुरक्षा नियम)
- Ring Test: ग्राइंडिंग व्हील को लगाने से पहले उस पर हल्के लकड़ी के हथौड़े से चोट मारकर ध्वनि की जाँच करें (Sound test) ताकि क्रैक का पता चल सके।
- Speed Check: सुनिश्चित करें कि मशीन के स्पिंडल की आरपीएम (RPM) व्हील पर अंकित अधिकतम सुरक्षित गति से अधिक न हो।
- Eye Protection: ग्राइंडिंग करते समय हमेशा सुरक्षा चश्मा (Safety Goggles) पहनें और गार्ड का उपयोग करें।
7. ITI Exam ke liye Important Points (परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु)
- Abrasive Selection: Aluminium oxide is used for high tensile strength materials, while silicon carbide is used for low tensile strength and hard, brittle materials.
- Glazing Definition: Glazing occurs when the cutting edges of abrasive grains become blunt and smooth through wear.
- Loading Definition: Loading occurs when metal chips get trapped between the abrasive grains of the wheel face.
- Dressing Function: Dressing cleans loaded wheels and restores sharp cutting edges using a diamond dresser.
- Ring Test Purpose: The ring test is performed to detect internal cracks in vitrified grinding wheels prior to mounting.
8. Conclusion (निष्कर्ष)
Grinding Wheels फिटर कार्यशाला के सबसे महत्वपूर्ण परिष्करण और कटिंग उपकरण हैं। ITI Fitter के छात्रों को अपघर्षक प्रकारों, बॉन्ड श्रेणियों, अंकन प्रणाली (Marking system), तथा ग्लेजिंग व ड्रेसिंग जैसी प्रक्रियाओं की संपूर्ण तकनीकी जानकारी होनी चाहिए।