Hole and Shaft Basis System Master
ITI Fitter Hole and Shaft Basis System Master Notes in Hindi:
Principles, Comparison & Workshop Guide
(होल और शाफ्ट बेसिस सिस्टम: सिद्धांत, तुलना और कार्यशाला मार्गदर्शिका)
इंजीनियरिंग मेट्रोलॉजी और असेंबली सिस्टम के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के फिट्स (Clearance, Interference, Transition) प्राप्त करने के लिए होल या शाफ्ट में से किसी एक के आकार को स्थिर (Constant) रखकर दूसरे के आकार में परिवर्तन करने की पद्धति को Hole and Shaft Basis System (होल और शाफ्ट बेसिस सिस्टम) कहा जाता है। ITI Fitter 1st & 2nd Year Theory पाठ्यक्रम के अंतर्गत असेंबली डिज़ाइन का यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण चैप्टर है।
इस विस्तृत मास्टर चैप्टर में हम होल बेसिस सिस्टम (Hole Basis System), शाफ्ट बेसिस सिस्टम (Shaft Basis System), इनके चयन के कारणों, तथा कार्यशाला में इनके उपयोग का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. Introduction and Core Purpose (परिचय और मुख्य उद्देश्य)
जब किसी मशीन में कई अलग-अलग प्रकार के फिट (जैसे रनिंग फिट, पुश फिट, फोर्स फिट) प्राप्त करने होते हैं, तो बार-बार होल और शाफ्ट दोनों के आकारों को बदलना उत्पादन की दृष्टि से बहुत खर्चीला होता है। इसलिए किसी एक घटक (या तो होल या शाफ्ट) के बेसिक साइज को स्थिर कर दिया जाता है और विभिन्न फिट पाने के लिए दूसरे घटक के साइज में बदलाव किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य फिटर छात्र में असेंबली डिजाइन की समझ और मानक कटिंग टूल्स (जैसे रीमर और ब्रोच) के चयन की दक्षता विकसित करना है।
Core Basis System Principle
Shaft Basis System: Shaft size is kept constant (Upper deviation = 0), and different fits are obtained by varying the hole size.
Motto: “Hole basis system is universally preferred in general engineering because standard-sized fixed tools like drills and reamers are cheaper to make for holes.”
2. Major Systems of Limits and Fits
1. Hole Basis System (होल बेसिस सिस्टम)
इसमें होल के आकार को स्थिर (Constant) रखा जाता है और विभिन्न फिट (Clearance/Interference) पाने के लिए शाफ्ट के साइज को बदला जाता है।
2. Shaft Basis System (शाफ्ट बेसिस सिस्टम)
इसमें शाफ्ट के आकार को स्थिर (Constant) रखा जाता है और विभिन्न फिट पाने के लिए होल के साइज को बदला जाता है।
3. Detailed Comparison Table (होल और शाफ्ट बेसिस सिस्टम तुलना तालिका)
| Feature / Parameter (विशेषता / पैरामीटर) | Hole Basis System (होल बेसिस सिस्टम) | Shaft Basis System (शाफ्ट बेसिस सिस्टम) |
|---|---|---|
| Constant Component | होल (Hole) का साइज स्थिर रहता है। | शाफ्ट (Shaft) का साइज स्थिर रहता है। |
| Variable Component | शाफ्ट (Shaft) के साइज को बदला जाता है। | होल (Hole) के साइज को बदला जाता है। |
| Tooling Economy | मानक रीमर और ड्रिल (Standard tools) का खर्च कम होता है क्योंकि होल का साइज फिक्स होता है। | विभिन्न आकारों के होल बनाने के लिए विशेष बोरिंग टूल्स की आवश्यकता होती है, जिससे खर्च बढ़ता है। |
| Industrial Preference | उद्योगों में सबसे अधिक व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है (Most preferred system)। | इसका उपयोग केवल तब किया जाता है जब एक ही शाफ्ट पर अलग-अलग फिट के कई पुर्जे चढ़ाने हों (जैसे पावर ट्रांसमिशन शाफ्ट)। |
सामान्य कार्यशालाओं (General Engineering Workshops) में होल बेसिस सिस्टम को शाफ्ट बेसिस सिस्टम की तुलना में क्यों अधिक प्राथमिकता दी जाती है?
Answer: क्योंकि होल बनाने वाले मानक कटिंग टूल्स (जैसे ड्रिल और रीमर) निश्चित आकार के होते हैं, जिससे टूलिंग लागत कम आती है।
4. Step-by-Step Selection Procedure in Workshop
| Step (चरण) | Procedure Details (प्रक्रिया विवरण) |
|---|---|
| 1. Analyze Assembly Requirement | देखें कि असेंबली में क्लियरेंस फिट चाहिए या इंटरफेरेंस फिट, और उसके अनुसार बेसिस सिस्टम चुनें। |
| 2. Apply Hole Basis (Standard Practice) | अधिकांश सामान्य डिजाइनों में होल बेसिस को चुनें जहाँ लोअर डेविएशन शून्य (Lower Deviation = 0, Basic Hole) रखा जाता है। |
| 3. Select Fixed & Adjustable Tools | होल के लिए फिक्स साइज का रीमर चुनें और शाफ्ट की विभिन्न फिटिंग के लिए लेथ या ग्राइंडर पर कटिंग करें। |
| 4. Verify with Gauges | तैयार पुर्जों की जाँच के लिए गो (Go) और नो-गो (No-Go) प्लग गेज और रिंग गेज का उपयोग करें। |
5. Essential Rules for Using Basis Systems
- Preference of Hole Basis: यदि कोई विशेष कारण न हो, तो हमेशा होल बेसिस सिस्टम का ही चयन करना चाहिए क्योंकि इससे उत्पादन लागत और कटिंग टूल्स का खर्च कम होता है।
- Shaft Basis Application: शाफ्ट बेसिस का उपयोग मुख्य रूप से टेक्सटाइल मशीनों या लंबी ट्रांसमिशन शाफ्ट के मामले में किया जाता है जहाँ एक ही व्यास की शाफ्ट पर अलग-अलग बेयरिंग या गियर फिट करने होते हैं।
- Standardization: दोनों प्रणालियों में भारतीय मानक (BIS / ISO) के अनुसार लिमिट्स और फिट्स के सूचकांकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
6. ITI Exam ke liye Important Points (परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु)
- Hole Basis Definition: In a hole basis system, the size of the hole is kept constant, and different fits are obtained by varying the shaft size.
- Shaft Basis Definition: In a shaft basis system, the size of the shaft is kept constant, and different fits are obtained by varying the hole size.
- Why Hole Basis is Popular: Hole basis is preferred because standard drilling and reaming tools of fixed sizes are readily available and economical.
- Basic Hole Characteristic: In a hole basis system, the lower deviation of the hole is zero (referred to as a ‘Hole H’).
- Basic Shaft Characteristic: In a shaft basis system, the upper deviation of the shaft is zero (referred to as a ‘Shaft h’).
7. Conclusion (निष्कर्ष)
Hole and Shaft Basis System फिटर ट्रेड की मेट्रोलॉजी और असेंबली डिजाइन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैद्धांतिक चैप्टर है। ITI Fitter के छात्रों को होल बेसिस और शाफ्ट बेसिस प्रणालियों के अंतर, उनकी कार्यप्रणाली, तथा औद्योगिक उपयोगों का पूर्ण व्यावहारिक ज्ञान होना चाहिए।