Power Transmission and Distribution: Generation, Substation, Primary & Secondary Distribution
ITI Electrician Power Transmission and Distribution Master Notes in Hindi:
Generation, Substation, Primary & Secondary Distribution
(विद्युत पारेषण और वितरण: उत्पादन, उपकेंद्र, प्राथमिक और द्वितीयक वितरण)
विद्युत शक्ति संयंत्र (Power Generation Station) पर बिजली उत्पन्न होने से लेकर उसे लंबी दूरी तक पहुँचाने और अंतिम उपभोक्ता (Consumer) तक सुरक्षित वितरित करने की पूरी व्यवस्था को Power Transmission and Distribution Network (पारेषण और वितरण नेटवर्क) कहा जाता है। ITI Electrician Trade Theory और पावर सिस्टम के अंतर्गत यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक टॉपिक है।
बिजलीघरों में आमतौर पर 11 kV पर विद्युत उत्पन्न होती है, जिसे लंबी दूरी तक भेजने के लिए उच्च वोल्टेज (High Voltage) पर स्टेप-अप किया जाता है। इस विस्तृत मास्टर चैप्टर में हम विद्युत उत्पादन, सबस्टेशन उपकरण, प्राथमिक और द्वितीयक पारेषण तथा प्राथमिक एवं द्वितीयक वितरण का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. Power System Complete Flow (विद्युत प्रणाली का संपूर्ण प्रवाह)
Generation to Consumer Voltage Cascade (वोल्टेज श्रेणियां)
2. Power Generation (विद्युत ऊर्जा उत्पादन)
विद्युत ऊर्जा का उत्पादन मुख्य रूप से थर्मल पावर प्लांट, हाइड्रो पावर प्लांट, न्यूक्लियर पावर प्लांट या सोलर/विंड फार्म्स में किया जाता है। अधिकांश बड़े जनरेटर (Alternators) 3-फेस एसी पावर को 11 kV (या कुछ मामलों में 33 kV) वोल्टेज स्तर पर उत्पन्न करते हैं। चूंकि इस वोल्टेज पर सीधे लंबी दूरी तक बिजली भेजना आर्थिक और तकनीकी रूप से संभव नहीं है, इसलिए इसे स्टेप-अप किया जाता है।
3. Substation (उपकेंद्र) और उसके मुख्य उपकरण
सबस्टेशन पावर नेटवर्क का वह केंद्र है जहाँ वोल्टेज के स्तर को बदला जाता है, ऊर्जा को नियंत्रित किया जाता है और सिस्टम की सुरक्षा की जाती है।
Power Transformers
वोल्टेज को स्टेप-अप या स्टेप-डाउन (Step-up / Step-down) करने के लिए उपयोग होने वाले विशाल ट्रांसफॉर्मर।
Circuit Breakers & Isolators
फॉल्ट आने पर सर्किट को ऑटोमैटिकली ट्रिप करने और रखरखाव के दौरान लाइन को अलग (Isolate) करने के लिए।
Lightning Arresters
आकाशीय बिजली (Lightning Surges) या स्विचिंग ओवरवोल्टेज से महंगे उपकरणों की सुरक्षा के लिए सर्ज अरेस्टर।
Bus Bars & CT-PT
कई लाइनों को जोड़ने वाली कॉमन बस बार और हाई करंट/वोल्टेज को मापने के लिए करंट व पोटेंशियल ट्रांसफॉर्मर।
4. Primary Transmission (प्राथमिक पारेषण)
उत्पादित 11 kV वोल्टेज को जनरेटिंग स्टेशन के पास स्थित सबस्टेशन पर लगे स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर के माध्यम से 132 kV, 220 kV, 400 kV या उससे अधिक हाई वोल्टेज में बदला जाता है। इतने उच्च वोल्टेज पर बिजली को बहुत लंबी दूरी (Long Distance Bulk Power Transfer) तक ट्रांसमिशन टावरों के जरिए भेजा जाता है। हाई वोल्टेज पर भेजने से लाइन करंट (I) कम हो जाता है, जिससे I²R लॉसेस (Line Copper Losses) न्यूनतम हो जाते हैं।
5. Secondary Transmission (द्वितीयक पारेषण)
प्राथमिक ट्रांसमिशन लाइनें जब शहर या मुख्य लोड सेंटर के पास पहुँचती हैं, तो वहाँ Receiving Station (प्राथमिक सबस्टेशन) पर वोल्टेज को स्टेप-डेटा करके 33 kV या 66 kV कर दिया जाता है। इस माध्यम वोल्टेज पर बिजली को शहर के विभिन्न उपकेंद्रों (Sub-stations) तक पहुँचाया जाता है।
6. Primary Distribution (प्राथमिक वितरण)
प्राथमिक सबस्टेशन पर 33 kV या 66 kV की लाइन को स्टेप-डाउन करके 11 kV 3-phase 3-wire system में बदला जाता है। यह 11 kV फीडर लाइनें शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाती हैं। बड़े भारी उद्योगों (Large Industrial Consumers) को 11 kV की यह सप्लाई सीधे उनके निजी ट्रांसफॉर्मर के लिए दी जाती है।
7. Secondary Distribution (द्वितीयक वितरण)
यह उपभोक्ताओं तक बिजली पहुँचाने का अंतिम चरण है। स्थानीय क्षेत्र या मोहल्ले में लगे डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (Pole Mounted Distribution Transformer) के माध्यम से 11 kV वोल्टेज को घटाकर 400V (Phase-to-Phase) 3-phase 4-wire system में बदला जाता है। इसमें किन्हीं दो फेज के बीच 400V और एक फेज व न्यूट्रल के बीच 230V Single Phase आपूर्ति प्राप्त होती है, जो घरेलू (Domestic) और छोटे коммерियल उपभोक्ताओं को दी जाती है।
| Power System Stage (चरण) | Typical Voltage Level (वोल्टेज स्तर) | Main Function & Purpose (मुख्य कार्य) |
|---|---|---|
| Power Generation | 11 kV (3-Phase AC) | ईंधन या जल ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलना। |
| Primary Transmission | 132 kV, 220 kV, 400 kV | उत्पादित बिजली को बहुत लंबी दूरी तक भारी मात्रा में भेजना। |
| Secondary Transmission | 33 kV / 66 kV | बिजली को रिसीविंग स्टेशन से सब-स्टेशन तक पहुँचाना। |
| Primary Distribution | 11 kV (3-Phase) | बड़े उद्योगों और द्वितीयक सबस्टेशनों को बिजली देना। |
| Secondary Distribution | 400V (3-Phase) / 230V (1-Phase) | घरेलू, कमर्शियल और छोटे उपभोक्ताओं को अंतिम आपूर्ति देना। |
घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic Consumers) को सामान्यतः किस वोल्टेज स्तर पर द्वितीयक वितरण (Secondary Distribution) किया जाता है?
Answer: 230V Single Phase AC (और 3-phase के लिए 400V)
8. Overhead Lines vs Underground Cables in Distribution
वितरण नेटवर्क में बिजली पहुँचाने के लिए दो प्रमुख प्रणालियों का उपयोग किया जाता है:
- Overhead Distribution: लकड़ी या आरसीसी पोल्स (Poles), क्रॉस-आर्म्स और पिन/शैकल इंसुलेटर्स का उपयोग करके खुले तारों से सप्लाई देना। यह सस्ती और आसान होती है।
- Underground Distribution: घनी आबादी वाले शहरों में केबल्स को जमीन के नीचे बिछाना। यह अधिक सुरक्षित, सुंदर और मौसम से प्रभावित न होने वाली प्रणाली है, लेकिन इसकी प्रारंभिक लागत बहुत अधिक होती है।
9. Feeders, Distributors and Service Mains (वितरण नेटवर्क के मुख्य भाग)
डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है:
- Feeders (फीडर्स): वे भारी लाइनें जो सबस्टेशन से डिस्ट्रीब्यूटर तक बिजली लाती हैं और रास्ते में इनसे कोई टैपिंग नहीं की जाती।
- Distributors (डिस्ट्रीब्यूटर): वह लाइन जिससे उपभोक्ता कनेक्शन के लिए विभिन्न टैप्स (Tappings) निकाले जाते हैं।
- Service Mains (सर्विस मेंस): डिस्ट्रीब्यूटर पोल से उपभोक्ता के एनर्जी मीटर तक आने वाला छोटा केबल कनेक्शन।
10. Common Faults and Troubleshooting in Distribution (सामान्य दोष और निवारण)
| Fault / Issue (दोष) | Possible Causes (संभावित कारण) | Corrective Actions (सुधारात्मक कदम) |
|---|---|---|
| Line Short Circuit / Earth Fault | पेड़ की डालियों का तारों से छूना, इंसुलेटर का पंचर होना, आंधी-तूफान | पेट्रोलिंग करके फाल्ट ठीक करना, क्षतिग्रस्त इंसुलेटर बदलना। |
| Low Voltage at Consumer End | ओवरलोडिंग (Overloading), ट्रांसफॉर्मर की क्षमता कम होना, लंबी लाइन ड्राप | ट्रांसफॉर्मर अपग्रेड करना या नया डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर लगाना। |
| Phase Imbalance | एक फेज पर अत्यधिक लोड और दूसरे पर कम लोड होना | लोड को तीनों फेजों पर बराबर रूप से वितरित (Load Balancing) करना। |
11. Applications and Utility (अनुप्रयोग और महत्व)
- Urban & Rural Electrification: देश के कोने-कोने तक घरों, स्कूलों और अस्पतालों में निर्बाध बिजली पहुँचाना।
- Industrial Power Feed: कारखानों और उद्योगों को भारी मशीनरी चलाने के लिए निरंतर 3-फेस पावर देना।
- Agricultural Supply: ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई के लिए कृषि पंपों हेतु बिजली प्रदान करना।
12. ITI Electrician Exam ke liye Important Points (परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु)
- Generation Voltage: Typically 11 kV 3-phase AC.
- High Voltage Benefit: Reduces line current, thereby minimizing I²R copper losses.
- Primary Transmission Voltage: 132 kV, 220 kV, or 400 kV.
- Primary Distribution Voltage: 11 kV 3-phase 3-wire.
- Secondary Distribution Voltage: 400V (Phase-to-Phase) and 230V (Phase-to-Neutral).
- Lightning Arrester Role: Protects transmission and distribution equipment from high voltage surges.
13. Conclusion (निष्कर्ष)
Power Transmission and Distribution किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे की रीढ़ है। ITI Electrician के छात्रों को उत्पादन से लेकर उपकेंद्रों, प्राथमिक और द्वितीयक पारेषण तथा वितरण के सभी वोल्टेज लेवल्स की स्पष्ट और तकनीकी जानकारी होनी चाहिए।
यह टॉपिक CBT Exam, ट्रेड थ्योरी परीक्षाओं और इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम प्रैक्टिकल के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।